फ़रिश्ते — इलाही निज़ाम के निगहबान

कायनात की हर हरकत एक पोशीदा निज़ाम और इन्तिज़ाम की गवाह है, जहाँ अल्लाह तआला के नूरी बंदे ख़ामोशी से अपने फराइज़ अंजाम दे रहे हैं।
ये फ़रिश्ते अम्र-ए-इलाही के अमीन हैं, कायनाती तवाज़ुन के मुहाफ़िज़ और इंसानों के हर क़ौल व अमल के निगरान हैं।
इन पर ईमान लाना, ग़ैब की हक़ीक़त को तस्लीम करना और बंदगी के शऊर को मज़बूती देना है।

अल्लाह तआला ने कायनात के निज़ाम को चलाने के लिए बेशुमार ग़ैर मरई (अदृश्य) क़ुव्वतें पैदा फरमा रखी हैं,
उन्हीं में से फ़रिश्ते भी इलाही निज़ाम के ख़ादिम हैं।
इनमें से कुछ वही के पैग़ामबर हैं, कुछ रूह क़ब्ज़ करने वाले, कुछ इंसानों के आमाल के निगहबान, और कुछ कायनाती नज़्म-ओ-ज़ब्त के नाज़िम…
मगर ये नज़र नहीं आते।
हमें बग़ैर देखे ही इन पर ईमान लाना है,
क्योंकि रब-ए-करीम और सादिक़-ओ-अमीन ﷺ ने इनके वजूद और अमल की ख़बर दी है।


फ़रिश्तों पर ईमान

ईमान के छह अरकान में से एक अहम रुक्न फ़रिश्तों पर ईमान है।
इसका मतलब यह है कि हम कुरआन-ए-करीम और अहादीस-ए-मुबारका में ज़िक्र की गई तफ़सील के मुताबिक़,
फ़रिश्तों के वजूद, उनकी ज़िम्मेदारियों और उनकी सिफ़ात पर मुकम्मल यक़ीन रखें।


फ़रिश्तों पर ईमान की सूरतें

1. फ़रिश्तों के वजूद पर ईमान

फ़रिश्ते अल्लाह तआला की नूरी मख़लूक़ हैं,
जो अल्लाह के मुकम्मल फ़रमाबरदार हैं,
और एक लम्हा के लिए भी नाफ़रमानी नहीं करते।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं:

لَا يَعْصُونَ اللَّهَ مَا أَمَرَهُمْ وَيَفْعَلُونَ مَا يُؤْمَرُونَ
“वो (फ़रिश्ते) अल्लाह की नाफ़रमानी नहीं करते, बल्कि जो हुक्म दिया जाता है, उसे बजा लाते हैं।”
(सूरत अत-तहरीम: 6)

2. फ़रिश्ते हर वक़्त इबादत में लगे रहते हैं

وَلَهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَمَنۡ عِندَهُۥ لَا يَسۡتَكۡبِرُونَ عَنۡ عِبَادَتِهِۦ وَلَا يَسۡتَحۡسِرُونَ
يُسَبِّحُونَ ٱلَّيۡلَ وَٱلنَّهَارَ لَا يَفۡتُرُونَ
“जो कोई आसमानों और ज़मीन में है, सब उसी (अल्लाह) के बंदे हैं, और जो (फ़रिश्ते) उसके पास हैं, वो ना इबादत से इंकार करते हैं और ना थकते हैं।
वो रात-दिन उसकी तस्बीह करते हैं और कभी सुस्ती नहीं करते।”

(सूरतुल अंबिया: 19)

3. फ़रिश्तों की तादाद पर ईमान

फ़रिश्तों की तादाद सिर्फ़ अल्लाह तआला ही जानते हैं, लेकिन वो बेहिसाब हैं।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं:

وَمَا يَعْلَمُ جُنُودَ رَبِّكَ إِلَّا هُوَ
“और तुम्हारे रब के लश्करों को उसके सिवा कोई नहीं जानता।”
(सूरत अल-मुद्दस्सिर: 31)

रसूलुल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:

“आसमान चरचराने लगा, और उसे ऐसा करना चाहिए,
क्योंकि उसमें चार उंगलियों के बराबर भी कोई जगह नहीं,
जहाँ कोई फ़रिश्ता सज्दे में गिरा हुआ ना हो।”

(जामिअ तिर्मिज़ी)


4. फ़रिश्तों की सिफ़ात पर ईमान

(i) फ़रिश्ते नूर से पैदा किए गए हैं

हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया:

“फ़रिश्तों को नूर से पैदा किया गया,
जिन्नों को आग की लौ से,
और आदम को उस चीज़ से जो तुम्हें बयान की गई (यानी मिट्टी से)।”

(सहीह मुस्लिम)

(ii) फ़रिश्ते बहुत ज़्यादा ताक़तवर होते हैं

क़ुरआन-ए-करीम में जिब्रील अमीन अलैहिस्सलाम के बारे में फ़रमाया गया:

إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ ۝ ذِي قُوَّةٍ عِندَ ذِي الْعَرْشِ مَكِينٍ
“बेशक यह (क़ुरआन) एक बुज़ुर्ग क़ासिद (फ़रिश्ते) का कहा हुआ है, जो बहुत ताक़तवर है और अर्श के मालिक के नज़दीक बड़े मर्तबे वाला है।”
(सूरतु तक़वीर: 19–20)

हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“मुझे उस फ़रिश्ते के बारे में बताने की इजाज़त दी गई है,
जो अर्श को उठाने वाले फ़रिश्तों में से एक है।
उसके कान की लोब से कंधे तक का फासला 700 साल की मसाफ़त जितना है।”

(सुनन अबू दाऊद)


(iii) फ़रिश्तों के पर (पंख) होते हैं

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं:

الْحَمْدُ لِلَّهِ فَاطِرِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ جَاعِلِ الْمَلَائِكَةِ رُسُلًا أُولِي أَجْنِحَةٍ مَثْنَىٰ وَثُلَاثَ وَرُبَاعَ ۚ
“सब तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं,
जो आसमानों और ज़मीन का पैदा करने वाला है,
और फ़रिश्तों को क़ासिद बनाया,
जिनके दो-दो, तीन-तीन और चार-चार पर हैं।”

(सूरत फातिर: 1)

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं:

“रसूलुल्लाह ﷺ ने जिब्रील अलैहिस्सलाम को उनकी असल सूरत में देखा।
उनके 600 पर (पंख) थे, और हर पर ने सारे अफ़क़ (आसमान) को ढक रखा था।
और उनके पंखों से मोती और याकूत जैसे जवाहरात गिर रहे थे।”

(मुस्नद अहमद)


(iv) फ़रिश्ते न खाते हैं, न पीते हैं

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के पास आने वाले फ़रिश्तों का ज़िक्र करते हुए, अल्लाह तआला फ़रमाते हैं:

“फिर वो (इब्राहीम) चुपके से अपने घर वालों के पास गए,
और एक फर्बह बछड़ा (का गोश्त) लाकर पेश किया।
फिर उन्होंने कहा: ‘क्या तुम लोग खाओगे नहीं?’”

(सूरत अध-धारियात: 26–27)

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“फ़रिश्तों की खुराक तस्बीह है,
और उनका शरबत तौहीद और तक़दीस है।”

(अल-मुअजम अल-औसत लि तबरानी)


(v) फ़रिश्ते हमेशा इबादत में रहते हैं

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“आसमान में चार उंगलियों के बराबर भी कोई जगह नहीं,
जहाँ कोई फ़रिश्ता क़ियाम, रुकूअ या सज्दे की हालत में न हो।”

(मुस्नद अहमद)


(vi) फ़रिश्ते मर्द या औरत नहीं होते

फ़रिश्ते अल्लाह तआला की ख़ास मख़लूक़ हैं, और इंसानों की तरह न मर्द होते हैं, न औरत।

क़ुरआन में फ़रमाया गया:

وَجَعَلُوا الْمَلَائِكَةَ الَّذِينَ هُمْ عِبَادُ الرَّحْمَٰنِ إِنَاثًا ۚ أَشَهِدُوا خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَادَتُهُمْ وَيُسْأَلُونَ
“और उन्होंने फ़रिश्तों को, जो रहमान के बंदे हैं, औरतें बना लिया!
क्या वो उनकी तख़लीक़ के वक्त मौजूद थे?
उनकी ये गवाही लिख ली जाएगी और उनसे पूछा जाएगा।”

(सूरतुज़-ज़ुख़रुफ़: 19)

5. फ़रिश्तों के कामों पर ईमान

अल्लाह तआला ने फ़रिश्तों के ज़िम्मे मुख़्तलिफ़ ख़ास काम लगाए हैं।
उनमें से कुछ नाम और उनके काम ये हैं:


हज़रत जिब्रील अ़लैहिस्सलाम

वही लाने वाले फ़रिश्ते

अल्लाह तआला का पेग़ाम नबियों तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी इनके पास थी।

نَزَلَ بِهِ الرُّوحُ الْأَمِينُ
“इस (क़ुरआन) को रूह-उल-अमीन (जिब्रील) लेकर उतरे।”
(सूरत अश-शुअरा: 193)


हज़रत मीकाईल अ़लैहिस्सलाम

रिज़्क़ और बारिश के इंतज़ामात पर मुक़र्रर

बारिश बरसाना और रोज़ी की तक़सीम का काम इनके सुपुर्द है।


हज़रत इसराफ़ील अ़लैहिस्सलाम

क़ियामत के दिन सूर फूंकने वाले

क़ियामत की निशानी के तौर पर सूर फूंकने की ज़िम्मेदारी इन्हीं के हवाले की गई है।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं:

“जिब्रील अ़लैहिस्सलाम वही के लिए मुक़र्रर हैं,
मीकाईल अ़लैहिस्सलाम बारिश और नबातात (रिज़्क़) के लिए,
और इसराफ़ील अ़लैहिस्सलाम सूर फूंकने के लिए।”

(मुस्तदरक हाकिम)


हज़रत अज़राईल अ़लैहिस्सलाम (मलकुल मौत)

रूहें क़ब्ज़ करने वाले फ़रिश्ते

मलकुल मौत, यानी मौत का फ़रिश्ता — अल्लाह के हुक्म से मख़लूक़ की रूह क़ब्ज़ करने की ड्यूटी अंजाम देते हैं।

قُلْ يَتَوَفَّاكُمْ مَّلَكُ الْمَوْتِ الَّذِي وُكِّلَ بِكُمْ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُمْ تُرْجَعُونَ
“कहो: मौत का फ़रिश्ता जो तुम पर मुक़र्रर किया गया है, तुम्हारी रूहें क़ब्ज़ करेगा, फिर तुम अपने रब की तरफ़ लौटाए जाओगे।”
(सूरत अस-सज्दा: 11)

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“जब अल्लाह तआला किसी बंदे की रूह किसी ख़ास ज़मीन पर क़ब्ज़ करना चाहते हैं,
तो वहाँ जाने का कोई सबब बना देते हैं,
और जब उसका वक़्त पूरा होता है,
तो मलकुल मौत उसकी रूह क़ब्ज़ कर लेते हैं।”

(मुस्नद अहमद)


हज़रत किरामन कातिबीन अ़लैहिमुस्सलाम

अमाल लिखने वाले दो फ़रिश्ते

हर इंसान के साथ दो फ़रिश्ते होते हैं — एक दाहिने, दूसरा बाएँ —
जो हर बात, हर अमल को लिखते रहते हैं।

إِذْ يَتَلَقَّى ٱلْمُتَلَقِّيَانِ عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ قَعِيدٌ ۝ مَّا يَلْفِظُ مِن قَوْلٍ إِلَّا لَدَيْهِ رَقِيبٌ عَتِيدٌ
“जब दो लेने वाले (फ़रिश्ते)
एक दाहिने और एक बाएँ बैठते हैं,
और इंसान कोई बात ज़बान से नहीं निकालता,
मगर उसके पास एक निगहबान तैयार रहता है जो लिख लेता है।”

(सूरत क़ाफ़: 17–18)

إِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَافِظِينَ ۝ كِرَامًا كَاتِبِينَ ۝ يَعْلَمُونَ مَا تَفْعَلُونَ
“तुम पर निगहबान मुक़र्रर हैं,
जो बुज़ुर्ग और आमाल लिखने वाले हैं,
और जो कुछ तुम करते हो उसे जानते हैं।”

(सूरतुल इंफ़ितार: 10–12)

हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं:

“रात और दिन के फ़रिश्ते तुम्हारे पास बारी-बारी आते हैं,
और फज्र व असर की नमाज़ में वो जमा होते हैं।
फिर जो फ़रिश्ते रात में रहे, वो ऊपर जाते हैं,
और अल्लाह तआला उनसे पूछते हैं —
‘तुमने मेरे बंदों को किस हाल में छोड़ा?’
तो वो कहते हैं:
‘हमने उन्हें नमाज़ अदा करते हुए छोड़ा, और जब आए थे तब भी वो नमाज़ पढ़ रहे थे।’”

(बुख़ारी व मुस्लिम)

6. बाक़ी अहम फ़रिश्ते और उनके काम

मुनकर और नकीर

क़ब्र में सवाल करने वाले फ़रिश्ते

जब किसी को दफ़नाया जाता है, तो क़ब्र में दो फ़रिश्ते आते हैं — मुनकर और नकीर।
ये इंसान से पूछते हैं:

मन् रब्बुका?” (तेरा रब कौन है?)
मा दीनुका?” (तेरा दीन क्या है?)
मा तक़ूलु फी हाज़ा र-रजुल?” (इस शख़्स [मुहम्मद ﷺ] के बारे में क्या कहता है?)

जो मोमिन होता है, वो कहता है:
“रब्बीअल्लाह, दीनियलइस्लाम, हाज़ा रसूलुल्लाह ﷺ।”

और जो ग़ैर मोमिन होता है, वो कहता है:
“हाहा… ला अदरी।” (हाय, मुझे कुछ मालूम नहीं!)

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“जब बंदा क़ब्र में रख दिया जाता है,
और उसके साथी पीछे हट जाते हैं,
तो वो उनके कदमों की आहट तक सुनता है।
फिर उसके पास दो फ़रिश्ते आते हैं…”

(सहीह बुख़ारी व मुस्लिम)


मालिक अ़लैहिस्सलाम

जहन्नम के दरोग़ा

जहन्नम के निगरान फ़रिश्ता “मालिक” हैं,
जिनके बारे में अल्लाह तआला फ़रमाते हैं:

وَنَادَوْا يَا مَالِكُ لِيَقْضِ عَلَيْنَا رَبُّكَ
“(जहन्नमी) पुकारेंगे: ऐ मालिक!
तेरे रब से कह कि हमारा काम तमाम कर दे।”

(सूरतुज़-ज़ुख़रुफ़: 77)

मालिक पूरी जहन्नम के मुहाफ़िज़ और अमल में सख़्त हैं।
कोई उनका हुक्म टाल नहीं सकता।


रिद्वान अ़लैहिस्सलाम

जन्नत के दरबान

जन्नत के निगरान फ़रिश्ते “रिद्वान” हैं —
जिनका काम है जन्नती बंदों का इस्तिक़बाल और उनकी खिदमत।


7. फ़रिश्तों पर ईमान — क्यों ज़रूरी है?

फ़रिश्तों पर ईमान लाना:

🔸 ग़ैब पर यक़ीन की दलील है
🔸 अल्लाह की कुदरत का इकरार है
🔸 हर वक़्त नेक आमाल पर आमादा रखने का ज़रिया है
🔸 गुनाह से डर और परहेज़ की तरबियत है
🔸 बंदगी और आज़माइश के सही मायने समझने की कुंजी है


8. आख़िरी नसीहत

एक मोमिन को हर वक़्त यह याद रखना चाहिए कि:

उसके आमाल लिखे जा रहे हैं
हर बात का हिसाब होगा
हर नेकी को फ़रिश्ते महफ़ूज़ कर रहे हैं
हर सज्दा, हर तस्बीह, हर आँसू का गवाह मौजूद है

अगर एक लम्हे को भी हम फ़रिश्तों की मौजूदगी को महसूस कर लें —
तो ज़िंदगी का हर लम्हा इबादत और तौबा में बदल जाए।


दुआ है कि अल्लाह तआला हमें सच्चा ईमान, फ़रिश्तों पर यक़ीन, और नेक आमाल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन — या रब्बल आलमीन!

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