Author: Mufti Mohd Inamullah Khan

तिलावत-ए-क़ुरआने करीम : शऊर से अमल तक, रौशनी का सफर

तिलावत : अरबी ज़बान का लफ़्ज़ है, इसका मतलब है पीछे चलना, इत्बा करना।क़ुरआन करीम के मआनी पर मुश्तमिल म’रूफ़ किताब:मुफरदातुल क़ुरआन में तिलावत के मअनी इसी तरह हैं: التِّلَاوَةُ…

अनवार-ए-हिदायत के रौशन चिराग़ : अंबिया-ए-किराम अलीहिमुस्सलाम

ईमान के बुनियादी अरकान में से एक अहम रکن — अल्लाह तआला के नबियों पर ईमान लाना है।इसका मतलब यह है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह तआला ने हर…

क़ुरआन करीम : इल्मी व अदबी मोजिज़ा

क़ुरआन करीम, इंसानी ज़िंदगी के हर पहलू पर हावी एक मुकम्मल ज़ाबिता-ए-हयात है। यह वो इल्मी मोजिज़ा है जिसकी रौशनी क़यामत तक आलम-ए-इंसानियत को राह दिखाती रहेगी। इसका ए’जाज़ सिर्फ़…

आस्मानी किताबें : रुश्द व हिदायत के सरचश्मे

अल्लाह तआला की जानिब से नाज़िल करदा आस्मानी किताबें इंसानियत के लिये रुश्द व हिदायत के सरचश्मे हैं। ये वो इलाही दस्तावेज़ हैं जिन्हों ने तारीकी में भटकती इंसानियत को…

फ़रिश्ते — इलाही निज़ाम के निगहबान

कायनात की हर हरकत एक पोशीदा निज़ाम और इन्तिज़ाम की गवाह है, जहाँ अल्लाह तआला के नूरी बंदे ख़ामोशी से अपने फराइज़ अंजाम दे रहे हैं।ये फ़रिश्ते अम्र-ए-इलाही के अमीन…