सहीफ़ा-ए-तक़दीर: क्या सब कुछ पहले से तय है?

ज़िंदगी ख़ुशी और ग़म, कामयाबी और नाकामी, उम्मीद और मायूसी का मज़मूआ है। कभी हम अपनी मेहनत के बावजूद नतीजे वैसे नहीं पाते जैसे चाहते हैं, और कभी बग़ैर किसी…

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