तिलावत-ए-क़ुरआने करीम : शऊर से अमल तक, रौशनी का सफर

तिलावत : अरबी ज़बान का लफ़्ज़ है, इसका मतलब है पीछे चलना, इत्बा करना।क़ुरआन करीम के मआनी पर मुश्तमिल म’रूफ़ किताब:मुफरदातुल क़ुरआन में तिलावत के मअनी इसी तरह हैं: التِّلَاوَةُ…

अनवार-ए-हिदायत के रौशन चिराग़ : अंबिया-ए-किराम अलीहिमुस्सलाम

ईमान के बुनियादी अरकान में से एक अहम रکن — अल्लाह तआला के नबियों पर ईमान लाना है।इसका मतलब यह है कि हम यक़ीन रखें कि अल्लाह तआला ने हर…

क़ुरआन करीम : इल्मी व अदबी मोजिज़ा

क़ुरआन करीम, इंसानी ज़िंदगी के हर पहलू पर हावी एक मुकम्मल ज़ाबिता-ए-हयात है। यह वो इल्मी मोजिज़ा है जिसकी रौशनी क़यामत तक आलम-ए-इंसानियत को राह दिखाती रहेगी। इसका ए’जाज़ सिर्फ़…

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